अजब गजब: मृत महिला के गर्भाशय से पैदा हुआ बच्चा!

पेरिस। मेडिकल इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि किसी मृत महिला का गर्भाशय ज़िंदा महिला में प्रत्योरोपित किया गया हो। यही नहीं मृत अंगदाता से प्राप्त गर्भाशय का प्रतिरोपण किये जाने के बाद एक महिला ने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया है। गौरतलब है कि ब्राज़ील के साओ पॉलो शहर में साल 2016 में मृत महिला के शरीर से गर्भाशय निकालकर मां बनने वाली महिला के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया था।

यह गर्भाशय की समस्या की वजह से बच्चे को जन्म देने में अक्षम महिलाओं के लिये नयी उम्मीद बनकर आया है। आपको बता दें कि जिस महिला का गर्भाशय लिया गया वो तीन बच्चों की मां थी और उनकी मौत दिमाग़ में ख़ून बहने की वजह से हो गई थी। वहीं, गर्भाशय पाने वाली महिला सिंड्रोम पीड़ित थी, इस सिंड्रोम की वजह से योनि और गर्भाशय सही ढंग से विकसित नहीं हो पाता है। 32 वर्षीय महिला दुर्लभ सिंड्रोम की वजह से बिना गर्भाशय के पैदा हुई थी। प्रतिरोपण के चार महीने पहले उसमें इन-विट्रो निषेचन किया गया जिससे आठ निषेचित अंडे प्राप्त हुए। इन्हें फ्रीज करके संरक्षित रखा गया। गर्भाशय दान करने वाली महिला 45 साल की थी। उसकी मस्तिष्काघात की वजह से मृत्यु हुई थी। उसका गर्भाशय ऑपरेशन के जरिये निकाला गया और दूसरी महिला में प्रतिरोपण किया गया। यह ऑपरेशन 10 घंटे से अधिक समय तक चला। ऑपरेशन करने वाले दल ने दाता के गर्भाशय को जिस महिला में उसका प्रतिरोपण किया गया उसकी धमनी, शिराओं, अस्थिरज्जु और वेजाइनल कैनाल से जोड़ा गया। लांसेट’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार यह सफल ऑपरेशन सितंबर 2016 में ब्राजील के साओ पाउलो में किया गया। यह दर्शाता है कि प्रतिरोपण व्यावहारिक हैं और गर्भाशय की समस्या की वजह से बच्चे को जन्म देने में अक्षम हजारों महिलाओं की मदद कर सकता है।

पहली घटना 2014 में स्वीडन में हुई थी

मेडिकल जर्नल ने बताया कि बच्ची का जन्म दिसंबर 2017 में हुआ। हाल तक गर्भाशय की समस्या की शिकार महिलाओं के लिये बच्चों को गोद लेना या सरोगेट मां की सेवाएं लेना ही विकल्प था। जीवित दाता (डोनर) से प्राप्त गर्भाशय के जरिये बच्चे का सफलतापूर्वक जन्म कराने की पहली घटना 2014 में स्वीडन में हुई थी। इसके बाद से 10 और बच्चों का इस तरह से जन्म कराया गया है। हालांकि, संभावित जीवित दाताओं की तुलना में प्रतिरोपण की चाह रखने वाली महिलाओं की संख्या अधिक है। इसलिये चिकित्सक यह पता लगाना चाहते थे कि क्या किसी मृत महिला के गर्भाशय का इस्तेमाल करके इस प्रक्रिया को अंजाम दिया जा सकता है।

पांच अलग-अलग तरह की दवाएं दी गईं थी महिला को

महिला का शरीर नये अंग को अस्वीकार नहीं कर दे इसके लिये उसे पांच अलग-अलग तरह की दवाएं दी गईं। पांच महीने बाद गर्भाशय ने अस्वीकार किये जाने का संकेत नहीं दिया। इस दौरान महिला का अल्ट्रासाउन्ड सामान्य रहा और महिला को नियमित रूप से माहवारी आती रही। सात महीने के बाद निषेचित अंडों का प्रतिरोपण किया गया। दस दिन बाद चिकित्सकों ने खुशखबरी दी कि महिला गर्भवती है। गुर्दे में मामूली संक्रमण के अलावा 32 सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान सबकुछ सामान्य रहा। करीब 36 सप्ताह के बाद ऑपरेशन के जरिये महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म के समय बच्ची का वजन ढाई किलोग्राम था।

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